शनिवार 26 सितंबर 2026 - 00:59
शहीद रहबर की तस्वीर उठाकर राष्ट्रपति पिज़िश्कियान ने संयुक्त राष्ट्र में मज़लूमों की आवाज़ बनकर ज़ालिमों का चेहरा बेनकाब किया: मौलाना नक़ी महदी ज़ैदी

तारागढ़ में जुमे की नमाज़ के ख़ुत्बे में इमाम-ए-जुमा तारागढ़ मौलाना नक़ी महदी ज़ैदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियान के भाषण को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्होंने ईरानी जनता के अधिकारों का स्पष्ट रूप से बचाव किया और शहीद रहबर आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई की तस्वीर उठाकर ईरान का दृष्टिकोण विश्व समुदाय के सामने पेश किया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, अजमेर/राजस्थान के तारागढ़ में जुमे की नमाज़ के ख़ुत्बे में इमाम-ए-जुमा तारागढ़ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सय्यद नक़ी महदी ज़ैदी ने तक़वा-ए-इलाही अपनाने पर ज़ोर देते हुए इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम की वसीयत की व्याख्या का सिलसिला जारी रखा। उन्होंने विशेष रूप से बड़े और बुज़ुर्ग लोगों के अधिकारों तथा उनके सम्मान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मौलाना नक़ी महदी ज़ैदी ने इमाम ज़ैनुल आबेदीन (अ) की हदीस का हवाला देते हुए कहा कि तुमसे बड़े और बुज़ुर्ग व्यक्ति का अधिकार यह है कि उसकी उम्र अधिक होने के कारण उसका सम्मान करो। अगर वह इस्लाम में श्रेष्ठता रखने वाला व्यक्ति है तो उसके इस्लाम को महत्व देते हुए उसे अपने से आगे रखो और उसके साथ मतभेद और दुश्मनी से बचो। उससे आगे न बढ़ो और रास्ते में उससे आगे निकलने की कोशिश न करो। उसके साथ अज्ञानता और असभ्यता का व्यवहार न करो और अगर वह तुम्हारे साथ ऐसा करे तो उसे सहन करो। उसके इस्लाम और उसकी उम्र के कारण उसका सम्मान और आदर करो, क्योंकि उम्र में बड़ाई का अधिकार भी इस्लाम के सम्मान से जुड़ा हुआ है।

ख़तीब-ए-जुमा तारागढ़ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना नक़ी महदी ज़ैदी ने उसूल-ए-काफ़ी की किताब ‘अल-इशरत’ में मौजूद ‘वुजूबे इज्लाले ज़िश्शैबिल मुस्लिम’ नामक अध्याय का हवाला देते हुए कहा कि इस अध्याय की रिवायतों से यह बात स्पष्ट होती है कि इस्लाम ने बुज़ुर्गों के अधिकारों का किस तरह ध्यान रखा है और उनके सम्मान के संबंध में हमें हमारी ज़िम्मेदारियों से किस प्रकार अवगत कराया है।

उन्होंने अब्दुल्लाह बिन सिनान की रिवायत बयान करते हुए कहा कि इमाम सादिक़ (अ) ने फ़रमाया: अल्लाह अज़्ज़ व जल का सम्मान करने में से एक यह भी है कि उम्रदराज़ मोमिन का सम्मान किया जाए। जो व्यक्ति किसी मोमिन का सम्मान करता है, वह वास्तव में अल्लाह के सम्मान की शुरुआत करता है। और जो व्यक्ति किसी उम्रदराज़ मोमिन को तुच्छ समझता है, अल्लाह उसकी मृत्यु से पहले ऐसे व्यक्ति को उसके पास भेजेगा जो उसे अपमानित करेगा।

मौलाना नक़ी महदी ज़ैदी ने कहा कि किसी बुज़ुर्ग का सम्मान करना मानो अल्लाह का सम्मान करना है और जो किसी मोमिन का आदर करता है, मानो उसने अल्लाह के सम्मान और आदर से शुरुआत की। इसके विपरीत जो व्यक्ति सफ़ेद बाल वाले मोमिन को तुच्छ समझता है, अल्लाह उसके पास ऐसा व्यक्ति भेजता है जो उसकी मृत्यु से पहले उसके साथ अपमानजनक व्यवहार करता है। यह वास्तव में कर्म और प्रतिक्रिया का नियम है।

उन्होंने एक दूसरी रिवायत का हवाला देते हुए कहा कि इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम ने रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम से नक़ल किया है कि आपने फ़रमाया: जो व्यक्ति किसी बुज़ुर्ग की उम्र के कारण उसकी श्रेष्ठता को पहचानकर उसका सम्मान करता है, अल्लाह उसे क़यामत के दिन के भय से सुरक्षित रखेगा।

उन्होंने एक हदीसे क़ुदसी का हवाला देते हुए कहा कि अल्लाह तआला फ़रमाता है: सफ़ेद बाल मेरा नूर हैं और मुझे शर्म आती है कि मैं अपने नूर को अपनी आग से अज़ाब दूँ।

उन्होंने कहा कि सफ़ेद बाल मेरा नूर हैं और मुझे इस बात से हया आती है कि अपने नूर को अपनी आग के ज़रिए अज़ाब दूँ।

उन्होंने आगे कहा कि क़बीला हुज़ैल का एक व्यक्ति रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम की सेवा में उपस्थित हुआ और उसने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! मेरी उम्र अधिक हो गई है, मेरी हड्डियां कमज़ोर हो गई हैं और मेरी ताक़त भी कम हो गई है। अब मैं नमाज़ और रोज़े को उस तरह अदा नहीं कर पाता जिस तरह करना चाहिए। आपने फ़रमाया: अपनी बात दोहराओ। तुम्हारे आसपास की हर चीज़ तुम्हारी हालत पर दया करके रो रही है, तो फिर अल्लाह तुम पर दया क्यों नहीं करेगा?

इमाम-ए-जुमा तारागढ़ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना नक़ी महदी ज़ैदी ने आगे रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम की एक रिवायत बयान करते हुए कहा कि अल्लाह तआला सुबह और शाम बुज़ुर्ग के चेहरे को देखता है और फ़रमाता है: मेरे बंदे! तेरी उम्र अधिक हो गई है, तेरी हड्डियां कमज़ोर हो गई हैं, तेरी त्वचा पतली और नाज़ुक हो गई है, तेरी मौत का समय करीब आ गया है और अब मेरे पास तेरे आने का समय निकट है। इसलिए मुझसे हया करो, क्योंकि मुझे तुम्हारे सफ़ेद बालों की वजह से इस बात से हया आती है कि तुम्हें आग में अज़ाब दूँ।

उन्होंने कहा कि इस अवसर पर रसूले अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम पर रोने की कैफ़ियत तारी हो गई। लोगों ने पूछा: या रसूलल्लाह! आप क्यों रो रहे हैं? आपने फ़रमाया: मैं उस व्यक्ति के लिए रोता हूं, जिससे अल्लाह को उसे अज़ाब देने में हया आती है, लेकिन वह अल्लाह से हया नहीं करता।

उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार की रिवायतों से यह बात स्पष्ट होती है कि अल्लाह तआला बुज़ुर्गों को आग और जहन्नम में जलाने से हया करता है। इसलिए बुज़ुर्ग और उम्रदराज़ लोगों को भी गुनाह और नाफ़रमानी से हया करनी चाहिए। कुछ लोगों को गुनाह करने की आदत हो जाती है। उन्हें चाहिए कि जल्द से जल्द तौबा के पानी से अपने आपको पाक करें और अपनी मग़फ़िरत का सामान तैयार करें।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना नक़ी महदी ज़ैदी ने कहा कि इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम के बयान और इन रिवायतों से हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि संभव है किसी समाज में उम्रदराज़ और बुज़ुर्ग लोगों की संख्या अधिक हो जाए और आधुनिक विचार रखने वाला वर्ग उन्हें अपने परिवार से अलग करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता न खोज पाए और उन्हें वृद्धाश्रम में भेज दे। लेकिन इस्लाम सफ़ेद बाल और सफ़ेद दाढ़ी को सम्मान और बरकत की निशानी मानता है और हमें आदेश देता है कि सफ़ेद दाढ़ी वाले लोगों का सम्मान करें।

उन्होंने कहा कि हमें बुज़ुर्गों के सामने खड़ा नहीं होना चाहिए और न ही उनसे नाराज़ होकर उन्हें दुखी करना चाहिए। बल्कि हमें यह हक़ीक़त स्वीकार करनी चाहिए कि वृद्धावस्था के कारण उनमें सहनशक्ति उतनी नहीं रहती जितनी जवानी में होती है। अब उनमें भूख, प्यास और दूसरी शारीरिक तकलीफ़ों को सहन करने की पहले जैसी ताक़त नहीं रहती। इसलिए उनके साथ धैर्य, सम्मान और प्रेम से पेश आना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र में ईरान की आवाज़ बनकर उभरे राष्ट्रपति पेज़ेशकियान

इमाम-ए-जुमा तारागढ़ हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना नक़ी मेहदी ज़ैदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियान के भाषण को गरिमापूर्ण और महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्होंने मज़बूत और स्पष्ट शब्दों में ईरानी जनता के अधिकारों का बचाव किया और अमेरिकी तथा ज़ायोनी अधिकारियों के अपराधों को दुनिया के सामने उजागर किया।

उन्होंने कहा कि डॉ. मसूद पेज़ेशकियान का यह भाषण वास्तव में महत्वपूर्ण और सराहनीय था और सम्मान तथा गरिमा पर आधारित बातों से भरपूर था। उन्होंने कहा कि ईरान के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि वह जिस ईरान से आए हैं, वहां उनके लोकप्रिय और प्रिय रहबर को शहीद कर दिया गया। इसी अवसर पर उन्होंने शहीद रहबर आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई की तस्वीर भी उठाई।

मौलाना नक़ी मेहदी ज़ैदी ने कहा कि राष्ट्रपति ईरान ने अपने भाषण में मीनाब स्कूल की मासूम बच्चियों को बमबारी का निशाना बनाए जाने का भी ज़िक्र किया और कहा कि हम आतंकवादी नहीं हैं, बल्कि आतंकवाद का शिकार हुए हैं, जबकि उनके अनुसार असली आतंकवादी अमेरिका और इज़राइल हैं।

उन्होंने आगे डॉ. मसूद पेज़ेशकियान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्राओं से जुड़े घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियान इसी अमेरिका के शहर वॉशिंगटन में लोगों के ज़मीर को झकझोर कर आए हैं, जबकि उनके अनुसार यही अमेरिका उन पर हमला करके उन्हें खत्म करना चाहता है।

उन्होंने कहा कि इसके विपरीत जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तुर्की से ब्रिटेन रवाना होना था और उन्हें ईरान की ओर से हत्या का डर था, तो अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा की पूरी योजना गुप्त रूप से बदल दी गई। ट्रंप को पहले अपने विमान एयर फ़ोर्स वन में सवार कराया गया, फिर गुप्त रूप से उस विमान से उतारा गया और एक कैटरिंग ट्रक के ज़रिए दूसरे स्थान पर ले जाकर एक दूसरे, अपेक्षाकृत कम पहचाने जाने वाले सैन्य विमान से रवाना किया गया।

मौलाना नक़ी मेहदी ज़ैदी ने आगे कहा कि इस मामले को इतना गुप्त रखा गया कि ट्रंप के साथ यात्रा करने वाले कई सहयोगियों और पत्रकारों को भी पता नहीं था कि अमेरिकी राष्ट्रपति उनके विमान में मौजूद नहीं हैं। उनके अनुसार खुद डोनाल्ड ट्रंप ने भी बाद में इस असामान्य बदलाव की पुष्टि की थी।

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